ये है भंसाली का हिट फॉर्मूला..

bajirao-mastaniमुंबइ। संजय लीला भंसाली अपने फिल्मों के बड़े और चकाचौंध करने वाले सेट के लिए जाने जाते है। वैसे ही उनकी कुछ चीजें कॉमन ही रहती है। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’ शरद बाबु की नॉवेल से प्रेरित है, जबकि ‘बाजीराव मस्तानी’ एक हिस्टोरिकल फिल्म है। फिर भी भंसाली ने दोनो में एक चीज कॉमन रखी है और वह है दो हीरोइनों का साथ में नृत्य।

फिल्म ‘देवदास” में पारो देवदास की प्रेमिका होती है और चंद्रमुखी एक कोठे की तवायफ, जो देवदास से बहुत प्रेम करती है। भंसाली ने फिल्म में दिखाया है कि दोनो ही देवदास से बहुत प्रेम करती है, इसलिए दोनों एक-दूसरे का काफी सम्मान करती है। यही बात उन्होंने गाने ‘डोला रे डोला रे’ से दिखाने की कोशिश की है। जिसमें पारो और चंद्रमुखी साथ में नृत्य करती हुईं नजर आती है।

यही चीज भंसाली ने अपनी फिल्म ‘बाजीराव-मस्तानी’ में भी आजमाई।

हांलाकि ये फिल्म एक हिस्टोरिकल बेस है, फिर भी भंसाली ने इसमें भी अपना वही प्रयोग फिर से दोहराया। काशीबाई बाजीराव की पत्नी थीं, जबकि मस्तानी उनकी माशुका।

भंसाली यहां भी सोचते है कि काशीबाई और मस्तानी दोनों बाजीराव से प्रेम करती है तो दोनो साथ मे नृत्य भी कर सकती है और ठीक वैसा ही गाना ‘पिन्गा-गा पोरी’ उन्होने दीपिका पादुकोण और प्रियंका चौपड़ा पर पिक्चराइज किया।

तब यह समझ में नहीं आता कि भंसाली की अपनी सोच है कि दो औरतें अगर किसी एक मर्द से प्यार करती है तो दोनो का एक दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ जाता है या फिर वे औरतों को मैसेज देना चाहते है कि आपका प्यार अगर किसी और से प्यार करता है तो उसका भी सम्मान करना सीखो।
क्योंकि दो औरतें कभी भी अपना प्यार किसी के साथ बांट नहीं सकतीं। चाहे वो पत्नी और प्रेमिका हो या फिर दो प्रेमिकाएं।

लेकिन हो सकता है कि ये भंसाली का पैटर्न हो। जैसे कि राज कपूर की फिल्मों की हीरोइन भोली-भाली और फिलॉसफर हुआ करती थी। उनका प्रेम भी बिना कोई शर्त के होता था।
वैसे जो भी हो भंसाली का ये फॉर्मूला हिट रहा है।

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