मोर्गन, एक बेकाबु महिला- लाजवाब है कहानी

मुंबइ। इस हपते आने वाली ‘मोर्गन’ एक साइ-फाइ फिल्म है। बॉलीवुड में साइ-फाइ फिल्मों को इतना इम्पोर्टन्स नहीं दिया जाता, 2-3 साल में रॉबोट या क्रिश जेसी फिल्में आजाती हैं। लेकीन हॉलीवुड में साइ-फाइ फिल्म बनना आम बात है। जिसमे अवतार, माशिॅयन, इन्टरस्टेलर, टाइममशीन जेसी कई फिल्मे है जीसकी लम्बी लिस्ट है। जैसे छे-सात महीने पहले आइ फिल्म ‘डेडपुल’ वेसे तो यह फिल्म सुपरहीरो की थी परंतु इसकी मुख्य कहानी मे वैज्ञानिक प्रयोग के दौरान ‘डेड’ का चेहरा बिगड जाता है।

एसी ही वैज्ञानिक भुलो से भरी कहानी यानीकि ‘मोर्गन’। इन्सान विज्ञान के विकास के साथ इतना बदलगया है कि वह कुदरत के नियमो के खिलाफ जा बेठा है। ऐसेही प्रयोग के भागरुप एक लड़कीको एक प्रयोगशाला मे जन्मानित किया। विविध वैज्ञानिक प्रयोग के परीपाक दैसीही यह जन्म के एकही महीने मे बोलना-चलना सिख जातीहै, ओर छह महीने मे वो आम युवती की तरह उसका शारीरिक विकास हो जाताहै।

पर ईस मे एसा बनता है कि यह मोर्गन नाम की 6 महीने की युवती कभी-कभी ईतनी गुस्से हो जाती है की एक बार तो वो जो लेबोरेटरी मे होती है , वहाके वैज्ञानिक को कृरतापुवॅक मार डालति हे। ओर उस के बाद सरुहोति है मोर्गन को काबू करने की कवायतें। ओर यह काम कोपॅोरेट ट्रबलशूटर ली वेधसॅ को सोपा जाता है। वेधसॅ सरफिरी मोर्गन का दिमाग काबू मे ला सकेगी के नही ये तो फिल्म देखने के बात ही मालुम पडे़गा।

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