‘पाच्र्ड’ केवल महिलाओं पर नहीं, सामाजिक मुद्दों पर आधारित है : लीना

पटना| देश की जानी मानी फिल्म निर्देशक लीना यादव का कहना है कि उनकी फिल्म ‘पाच्र्ड’ केवल महिलाओं पर ही केंद्रित नहीं है बल्कि इसमें उन सामाजिक मुद्दों को भी उठाया गया है, जिसका बड़े पैमाने पर लोग हर रोज सामाना करते हैं। पटना में गैर सरकारी संगठन ग्रामीण स्नेहा फाउंडेशन की ओर से चल रहे आठ दिवसीय बोधिसत्व अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2017 के दूसरे दिन आयोजित संवाददाता सम्मेलन में लीना यादव ने फिल्म का टाइटिल अंग्रेजी में रखने पर कहा, “फिल्म निर्माण के समय इसका टाइटिल पाच्र्ड रखा गया था और हम उसे बदलने वाले थे लेकिन जब टोरंटो में फिल्मोत्सव में इस टाइटिल को सराहा गया तब हमने यह निश्चय किया कि पाच्र्ड ही फिल्म का टाइटिल रहेगा।”

उन्होंने कहा, “अंग्रेजी में टाइटिल रखने से फिल्म को वैश्विक मंच मिलता है। दर्शक अधिक मिलते हैं। फिल्म की कहानी मैंने लिखी थी और यह मेरे दिल के बेहद करीब है। कहानी को सिनेमा के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की थी जिसे सभी ने बेहद सराहा।”

पटना में आयोजित इस फिल्मोत्सव के पहले दिन पाच्र्ड फिल्म दिखाई गई थी, जिसे लोगांे ने खूब सराहा। फिल्मोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को मराठी फिल्म ‘रिंगन’ और जापानी फिल्म ‘आलबिनोज ट्रीज’ सहित चार फिल्में दिखाई जा रही हैं।

लीना ने बताया कि पाच्र्ड की कहानी को कई अंतराष्ट्रीय समारोहों में प्रशंसा मिल चुकी है।

‘तीन पत्नी’ और ‘शब्द’ जैसी फिल्म निर्देशित कर चुकी लीना यादव की यह फिल्म भारत के ग्रामीण जीवन की पृष्ठभूमि पर बनी है। इसमें चार साधारण महिलाओं को सदियों पुरानी परंपराओं को तोड़ते और उन परंपराओं से मुक्त होते हुए दिखाया गया है। इस फिल्म में दहेज प्रथा, शारीरिक हिंसा, जबरन विवाह, दुष्कर्म और मानसिक उत्पीड़न जैसे मुद्दों को उठाया गया है।

उन्होंने कहा, “पाच्र्ड में करीब उन सभी सामाजिक मुद्दों को उठाया गया, जिसका बड़े पैमाने पर लोग सामना करते हैं। यह पुरुषों के बारे में भी है। समाज में महिला और पुरुष दोनों पीड़ित हैं।”

पाच्र्ड में तनिष्ठा चटर्जी ने राधिका आप्टे के साथ मुख्य भूमिका निभाई है। राधिका आप्टे के साथ काम करने के अनुभव करने के बारे में पूछे जाने पर तनिष्ठा ने कहा, “राधिका ने फिल्म में बेहतरीन काम किया है। उनके साथ काम करने का अनुभव बेहद शानदार रहा। फिल्म ही नहीं ‘क्रू’ में भी काफी महिलाएं थी और हमने काफी मजे किए।”

उन्होंने फिल्म उत्सवों में ‘पाच्र्ड’ के दिखाए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी चीजें से कलाकारों का हौसला बढ़ता है। पटना में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के सराहनीय कदम बताते हुए उन्होंने कहा कि यह महोत्सव युवाओं के लिए एक अच्छे अवसर की तरह है। उन्हें अधिक से अधिक फिल्में देखने को मिलेंगी और उन्हें सीखने का मौका भी मिलेगा।

इस दौरान फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम और मीडिया प्रभारी रंजन सिन्हा भी मौजूद रहे।

–आईएएनएस

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